पगडंडी(Story From Old BaalBharti Syllabus)



 मुल्क चीन में क्वाँग तू नाम का एक खूबसूरत गांव था इस गांव के करीब से एक ठंडे पानी का चश्मा बहता था. गांव की लड़कियां सुबह शाम खेतों से गुजर कर इस चश्मे पर पानी भरने आई थी. उनके आने जाने से खेतों में एक लकीर सी बनी, फिर वहां एक पगडंडी बन गई.

 पगडंडी ने पहली बार आंखें खोली तो देखा इस पर बादाम के घने पेड़ साया किए हुए हैं. टहनियों पर चिड़िया मीठी-मीठी बोलिया बोल रही हैं, नीले आसमान पर राजहंसो की कतार उड़ती चली जा रही है, लड़कियां हंसती खेलती इसके ऊपर से गुजर कर पानी भरने जा रही है, नर्म नर्म घास के दरमियान पगडंडी को यह सब कुछ बहुत अच्छा लगा. कुछ लड़कियां बादाम के दर्दों पर झूला झूल रही थी और गाना गा रही थीं, पगडंडी के गीत सुनकर बहुत खुश हुई.
 एक रात चांदनी खुली हुई थी, पगडंडी ठंडी हवा में खेतों में लेटी ऊँघ रही थी क्यों उसने सुना बदाम का पेड़ चश्मे से कह रहा था: " मुबारक हो हमारे घर नया मेहमान आया है" चश्मे ने कहा :" उसे दुबली पतली पगडंडी की बात कर रहे हो?"
" हां और किसकी बात करूंगा भला?"
" मुझे तो वह जरा पसंद नहीं"
"कियूं?"
" मरियल सी तो है!"
 चश्मे की बात सुनकर पगडंडी जल भूनकर रह गई. यह वाला अपने आप को समझता क्या है, बढ़ाया कहीं का!मैं तो इसे कभी मुंह भी ना लगाऊं- पगडंडी को इतना गुस्सा आया कि वह सारी रात सो ना सकी. दूसरी रात बादाम के पेड़ ने पगडंडी से कहा :" बेटी!चश्मे की बात का बुरा ना मानना वह जरा अख़खड़ मिज़ाज का है " पगडंडी ने तुनक कर कहा :" मैं क्यों बुरा मानु?मैं तो जानती भी नहीं कि वह कौन है " वक्त गुजरता गया बरसात आई और चली गई,सर्दियां और चली गईं, ना चश्मे ने पगडंडी को बुलाया न पगडंडी ने कोई बात की. 
 एक रात ठंडी हवा चल रही थी, चारों तरफ खामोशी छाई हुई थी. इतने में चश्मे की आवाज आई:" पगडंडी जाग रही हो?"
 पगडंडी ने कोई जवाब ना दिया. चशमे ने कहा:" पगडंडी!मेरी बातों का बुरा ना मानना मैं ने तो बस यूंही कह दिया था, सच पूछो तो जब तुम इन खेतों में पैदा हुई थी तब मैं बहुत खुश हुआ था, मगर मैंने अपनी खुशी जाहिर नहीं की. यकीन रखो ,मैं कभी तुम्हारे रास्ते की दीवार नहीं बनूँगा. मैं जानता हूं तुम एक बहुत बड़ा मकसद लेकर आई हो. तुम्हें आगे चलकर इंसानों के काम आना है भूले भटके मुसाफिरों को रास्ता दिखाना है. जो अपना घर छोड़कर प्रदेश जा रहे हों,उन्हें मंजिल तक पहुंचाना है. पगडंडी तुम्हारी खुशी दूसरों की खिदमत में है, लोग तुम्हारे ऊपर से गुजरेंगे और तुम्हें उनका साथ देना है. लोग तुम्हें पाव तले रो देंगे तुम्हें खामोश रहकर उन्हें उनके घरों तक पहुंचाना है. इन परिंदों की मीठी बोलियां में गुम ना हो जाना, बादाम की ठंडी छांव में पड़ी ना रह जाना, गांव की भोली भाली लड़कियों के केह्क़हों में मस्त ना हो जाना, जाओ पगडंडी!दुनिया तुम्हारी राह देख रही है. लोगों को तुम्हारी मदद की जरूरत है!ख़ुदा हाफ़िज़!"
 पगडंडी चश्मे की बातें गौर से सुनती रही, वह कुछ ना बोली अगले रोज उसने अपना सफर शुरू कर दिया. गांव से निकलकर वह कस्बे की तरफ चल पड़ी. अब ढोर-डांगर उसे रोंदते हुए गुजरते. किसान अनाज और चारे से लगी हुई गाड़ियां उस पर से लेकर गुजरते,वो उफ़ तक न करती. उसे बार-बार चश्मे की वह बात याद आती " पगडंडी!तुम एक बड़ा मकसद लेकर दुनिया में आई हो, तुम्हारी खुशी इंसानों की खिदमत में है!"
 पगडंडी ने कस्बे से निकल कर शहर की तरफ सफर शुरू किया. एक्रॉस मजदूर कुदालें लेकर आए. उन्होंने पगडंडी को खोज कर उसे पर रोड़ी की तेह बिछा दी. फिर से कुत्ता गया और इस पर तार-कोल डाल दिया गया. पगडंडी कुछ ना बोली मजदूरों ने टोकरियाँ भर भर कर इस पर बजरी डाल दी. सड़क टूटने वाला इंजन छुक-छुक करता पगडंडी के सीने पर चलने लगा. पगडंडी ने कुछ ना कहा,इसके कानों में बार-बार चश्मे की आवाज आती:
" पगडंडी! तुम्हारी खुशी दूसरों की खिदमत में है "


 अब पगडंडी सड़क बन गई. दरिया पार एक अस्पताल बन रहा था. ईटों और सामान के ट्रक इस पर से गुजरते रहे. अस्पताल बन गया तो वह बिजली घर की तरफ मुड़ गई. बिजली घर बनकर तैयार हो गया तो मजदूर पगडंडी के सीने पर पत्थर डालकर कुटते हुए उसे बच्चों के स्कूल की तरफ ले गए. स्नेहा तकलीफ खुशी से बर्दाश्त की. वह जानती थी कि इसके वतन के बच्चे यहां इल्म हासिल करेंगे, पाल लिखकर जवान होंगे और वतन की खुशहाली में हाथ बटाएंगे.
 इंजन इसके सीने पर चलते रहे वह खिदमत की धुन में आगे बढ़ती चली गई इसने तेज धूप की परवाह न की ना बारिश की. इस पर बर्फ पड़ती रही,ओले गिरते रहे,वह तमाम सख़्तीयाँ सहती गई. इसे अगर खुशी थी तो इस बात की कि वो इंसानों के काम आ रही है.
 आज गांव की वही छोटी सी पगडंडी शहर की सबसे बड़ी, सबसे चौड़ी खूबसूरत सड़क है. जिधर वह जाती है सारा शहर उधर ही को जाता है. इसकी सजावट पर हजारों रुपए खर्च होते हैं.सुबह शाम इसकी सफाई होती है.लोग इस पर से गुजर कर अपने दफ्तरों और कारखानों को जाते हैं,बच्चे स्कूल जाते हैं तो सड़क भी उन के साथ जाती है. वह बच्चों की भोली भाली बातें सुनकर खुश होती है. आज भी गांव का नीला आसमान बादाम के पेड़ की ठंडी-ठंडी छांव राजहंसो की उड़ती कतार उसे याद है, और वह चश्मा भी, जिसने कहा था:"तुम्हारी खुशी दूसरों की खिदमत में है ".

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