( लेखक : कृष्ण चंद्र )
अपने मोहल्ले में जो सलाम भाई रेहते हैँ ना, उन्हें कूपन जमा करने का बड़ा शौक़ है. मज़हब के बाद अगर इनका कहीं ईमान है तो इन कूपनों में. अभी चंद रोज़ का ज़िक्र है, मैं ने सलाम भाई की नाश्ते की प्लेट में पराठों के साथ सिगरेट की डाबिया देखी.मैंने सोचा 'कहीं ये कूपनों के शौक़ में पराठों के साथ सिगरेट तो नहीं ख़ाने लग पड़े?' इस लिए फ़ौरन ही इन से घबरा कर पूछा :"ये क्या माजरा है? नाश्ते की प्लेट में सिगरेट की डाबिया कैसी?
"सलाम भाई ने डबिया खोलते हुए कहा: ये सिगरेट की की डबिया नहीं है, मक्ख़न की डबिया है. "
मैंने सलाम भाई से कहा : आप नाश्ते के वक़्त हर रोज़ नई डबिया लाते हैँ!"
सलाम भाई बोले : मैं इसके कूपन जमा कर रहा हूँ."
"कूपन जमा करके क्या होगा?"
सलाम भाई bole: कूपनों से बोहत सी चीज़ें मुफ़्त में मिलती हैँ. "
"मुफ़्त? नहीं भला, ये कैसे मुमकिन हो सकता है?"
"हांजी बिलकुल मुफ़्त मिसाल के तौर पर अगर आपके पास इस मक्ख़न की डबिया के पांच सौ कूपन होंगे तो आप एक हरिकेन लालटेन हासिल कर सकते हैँ."
"लालटेन लेकर मैं क्या करूँगा? आज कल तो बिजली का ज़माना है."
"अच्छा लालटेन ना सही, लिस्ट में बोहत सी चीज़ों के नाम हैँ."
"लालटेन है" सलाम भाई ने लिस्ट पर नज़र दौड़ाते हुए कहा " सिगरेट जलाने का चांदी का लाइटर है, kiwi का जूता है, Rayon की जुराबे हैँ "
"फिर भी सलाम भाई!ये फ़ुज़ुल खर्ची है. आख़िर पांच सौ कूपन जमा करने में रुपया तो खर्च होता है ना!."
सलाम भाई बोले :"आप भी तो गज़ब करते हैँ. मक्ख़न तो रोज़ इस्तेमाल की जाने वाली चीज़ है, आप मक्ख़न खरीदते हैँ तो साथ में आपको कूपन मुफ़्त मिलता है. पांच सौ कूपन इसी तरह इकठ्ठा हो जाएं तो हरिकेन लालटेन, एक हज़ार हों तो चांदी की मुठ वाली छतरी,दो हज़ार हों तो पारकर फाउंटेंन पेन, दस हज़ार हों तो रेडिओ ग्राम! बोलिए!"
मैं लाजवाब हो गया. मैं ने पूछा:" मक्ख़न की डबिया जिस में कूपन आता है कितने की आती है?"
"दो रूपये में."
दूसरे दिन मैंने भी मक्ख़न की डबिया खरीदी. मुझे रेडियो ग्राम लेने का शैक़ था इसी लिए मैंने दिनों में चार चार डबिया खरीदनी शुरु की. मुझे मक्खन पसंद नहीं है, मैं दरअसल दही पसंद करता हूँ. मगर अब क्या किया जाए, मक्ख़न खरीदना था क्यूंकि मुझे रेडिओ ग्राम लेना था. रोज़ चार छे डबिया खरीदता और मक्ख़न खाने की कोशिश करता लेकिन अक्सर नाकाम रहता. इस लिए कूपन उठा कर जेब में डाल लेता और मक्ख़न सलाम भाई को दे देता. इस पर वो बोहत नाक -भूँ चढ़ाते, kehte:आप मक्ख़न रख लीजिए, कूपन हमें दे दीजिए. "
मैं केहता :"वाह! मुझे रेडिओ ग्राम लेना है इसी लिए मक्ख़न खा रहा हूँ, आप भी खाइये!"
अब मैंने ज़बरदस्ती घर में सब को मक्खन खिलाना शुरु कर दिया. थोड़े ही समय में ज़्यादा मक्ख़न के सेवन के कारण मुझे पेचिश की बीमारी हो गई और इसके इलाज में डेढ़ सौ रूपये खर्च हो गए. अब तक मेरे पास दो सौ कूपन जमा हो गए थे. मैं ने सोचा रेडिओ तो कहाँ आएगा, चलो इन दो सौ कूपनों का जो मिल जाए, ले लें. मैं दो सौ कूपन लेकर दूकानदार के पास गया. इसने कहा:"इन चीज़ों में से अपने लिए कोई एक चीज़ पसंद कर लें चीज़ें ये थीं :
1- काठ का घोड़ा छे साल के बच्चे की सवारी के लिए
2-बालों के पिनों के तीन सैट
3-बालों को घूँगारयाले बनाने की मशीन.
4-फलों का र्स निकालने की मशीन
5-आइसक्रीम खाने के लिए खूबसूरत प्लास्टिक का चमचा.
पहले तो सोचता रहा. इन में से कोई चीज़ अपने काम की नहीं, आख़िर आइसक्रीम खाने पर जी आ गया. मैंने प्लास्टिक का वो ख़ुबसूरत चमचा उठा लिया और रेस्टोरेंट में आइसक्रीम खाने चला गया. मैंने इस ख़ूबसूरत चमचे से छे प्लेटें ख़ूब डट कर खाई, लेकिन जब बिल अदा करने लगा तो देखता हूँ कि प्लेट में बिल के साथ एक कूपन भी धरा है. मैंने घबरा कर वेटर से पूछा :"ये क्या है? "
वेटर ने मुस्कुराते हुए कहा :"हमारे यहाँ जो छे प्लेट आइसक्रीम एकदम खाए उसे एक कूपन मिलता है. "
"मैं इस कूपन को लेकर क्या करूँगा?ना बाबा!मैं बाज़ आया, ये कूपन उठा लो."
वेटर ने मुझे इतमेन्यान दिलाते हुए कहा :"आप इसे ले जाइये, ये बडे काम कि छी है. आप को तो मुफ़्त मिल रहा है. आप किसी दोस्त को दे डालियेगा, वो हमेशा आपका एहसान मंद रहेगा. "
"अजी साहब!" वेटर ने एक लम्बी लिस्ट खोलते हुए कहा:"अगर आप के पास ऐसे एक दर्जन कूपन हों तो हम आपको ग्रेटा गारबो की फ्रेम की हुई ख़ूबसूरत तस्वीर देंगे.

चौबीस कूपन हो तो बाल उगाने की क्रीम. "
"मगर मैं गंजा नहीं हूँ!"
"पचास कूपन हों तो बायो केमिस्ट्री का चमड़े के बैग में पूरा दवाखान."
"काहे के लिए भाई?"
"बदहज़मी दूर करने के लिए और हर क़िस्म की बीमारी के इलाज के लिए!पांच सौ कूपन हों तो एक दो सीट की छोटी मोटर गाडी."
"बाप रे!" मैं उछल पड़ा. लाओ लाओ, इधर लाओ ये कूपन "
कूपन लेकर उस दिनों के बाद मैंने रोज़ वहाँ आइसक्रीम खाना शुरु कर दी. दो महीने में तीन सौ कूपन जमा कर लिए. अगले महीने और पचास बढ़ गए. लेकिन अब मुझसे आइसक्रीम न खाई जाती थी.
ऐसा मालुम होता था मैं आइसक्रीम नहीं कूपन खा रहा हूँ या आने वाली फ़ीएट FIAT कार के पुर्ज़े चबा रहा हूँ. फिर पचास कूपन और बढ़ गए. ये कूपन बड़ी मुश्किल से खाए गए. मेरा मतलब है आइसक्रीम बड़ी मुश्किल से चबाई गई. रोज़ रात को खट्टी डिकारें आतीं और ज़ुकाम भी हो जाता.दूसरे दोस्त बोहत समझाते मगर मुझ पर तो एक ही धुन सवार थी कि किसी तरह पांच सौ कूपन जमा हो जाएं, और अब तो सिर्फ एक सौ कूपन बाक़ी रह गए तो शाम के वक़्त मुझे कुछ बुख़ार सा महसूस हुआ. रात को मैं बेहोश हो गया.अगर सही समय पर इलाज ना होता तो सुबह तक परलोक सिधार जाता.मालूम हुआ ज़्यादा आइसक्रीम खाने के कारण मेरे फेफडों की झिल्ली में वरम पड़ गया है. दो महीने इलाज होता रहा जिसमे डेढ़ हज़ार रूपये खर्च हो गए. ख़ैर जब अच्छा हुआ तो कूपन उठा कर दुकान पर पुहंचा. मालूम हुआ इनाम या तो चार सौ कूपन पर मिलता है या पांच सौ कूपन पर चार सौ पिचत्तर कूपनों पर कुछ नहीं मिलेगा.
"तो चार सौ कूपन पर ही दे दीजिये."
"ये देखिये लिस्ट मैंने देखी, आप भी देखिए :
1- कोट टांगने की खुंटियाँ चौबीस.
2-सूट प्रेस करने की दो मशीने
3-बिजली से हजामत करने की मशीन.
4-Rayon की जुराबे चार.
5-औरत के लिए यूरोपयन हैट.
6-ऊँची heel के दो सैंडल.
मैंने पूछा :$ "चार सौ पिचत्तर कूपन में Fiat कार नहीं दोगे?"
"नहीं!वो तो पांच सौ कूपनों में आती है. आप पच्चिस कूपन और जमा कर लीजिए, इसमें कौन सी बड़ी बात है?"
"बड़ी बात!" मैंने गरज कर कहा :"मेरे फेफड़ों की झिल्ली पर वरम आ गया है आइसक्रीम खाते खाते और तुम पच्चिस कूपनों की रियाअत ना कर सके."
"हमें बड़ा अफ़सोस है."
मैंने कहा : तुम इन पैच्चिस कूपनों के बदले इस कार का हुड उतार लो, उसके आगे की दो बत्तीयाँ गायब कर दो या एक टायर पंक्चर कर दो. इस का इस्टेयरिंग व्हील तोड़ दो! मगर लिल्लाह वो कार मुझे देदो!







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