महागिरी

 एक बहुत बड़ा हाथी था. उसका नाम महागिरी था. वह इतना बड़ा था कि बच्चे उसके पास जाने से डरते थे.

महागिरी बहुत काम करता था. महावत का हकम मानता. जंगल जाता और कटे हुए पेड़ उठा लाता. त्योहार के जुलूस में महागिरी सबसे आगे होता. शादी ब्याह में महागिरी पर दूल्हा सवार  करते. वह बड़ा नेक और वफादार हाथी था.

एक मर्तबा गांव वाले त्योहार मना रहे थे. मैदान में एक ऊंचा झंडा गाड़ना था. उसके लिए एक खंबाकी जरूरत थी. कुछ लोग जंगल गए और एक ऊंचे पेड़ को काट गिराया, और उससे एक अच्छा सा खंबा तैयार किया. खंबा बड़ा ऊंचा और भारी था. इसलिए महागिरी को जंगल में ले आए. उसने अपनी सुण से खंबा उठाया और मैदान में ले आया.



खंबा गाड़ने के लिए गड़ा पहले ही से तैयार था. महावत ने महागिरी को इशारा किया महावीर को इशारा किया केवह गड़े मैं खंबा खड़ा करें. महावीर ने खंबा उठाया और गड़े की तरफ बडा. 

महागिरी गड़े के नजदीक आते ही रुक गया. महावत ने उसे आगे बढ़ने का हुक्म दिया, लेकिन वह उसी जगह खड़ा रहा. इस पर महावत को गुस्सा आ गया और उसने महागिरी को मारना शुरू किया. मगर वह टस से मस न हुआ और अपनी जगह पर डाटा रहा.
अब लोगों ने शोर मचाया. उन्होंने महावत और हाथी दोनों को बुरा भला कहना शुरू किया. इस पर महावत को और गुस्सा आया.
उसने महागिरी को इतना मारा कि वह लहू लोहान हो गया. आप महागिरी को भी गुस्सा आया. उसने खंबे को फेंक दिया. वह जोर से चिंगाड़ा और दोनों पैर उठाकर खड़ा हो गया. उसने सर और गर्दन को उस ज़ोर से झटका दिया के महावत जमीन पर आ रहा.
सब लोग घबरा गए. वह समझे हाथी पागल हो गया है. वह डर कर भागने लगे. सब लोग दूर चले गए तो महागिरी इस घड़े के पास गया. उसने घुटने टेक कर अपनी लंबी सुढ गड्ढे में डाली, अंदर से कोई चीज बाहर निकाली और उसे धीरे से जमीन पर रख दिया.
वह एक बिल्ली का बच्चा था, जो घड़े में छुपा बैठा था.



लोग दूर खड़े यह तमाशा देख रहे थे. आप उनके समझ में आया कि महागिरी महावत का होम क्यों नहीं मान रहा था.
महागिरी था तो बड़ा जानवर, लेकिन नहीं चाहता था कि बिल्ली के नन्हे से बच्चे को कोई तकलीफ पहुंचाएं. सब लोग उसके पास जमा हो गए.

अब महागिरी ने खंबा उठाया और उसे घड़े में खड़ा कर दिया. लोगों ने गड़ा भर दिया और थोड़ी देर में खंबे पर झंडा लहराने लगा.




















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