पेड़ों का राजा?

 




एक दिन जंगल के पेड़ बातें करते-करते आपस में उलझ गए और लड़ने लगे. झगड़ा इस बात पर था कि इनमें कौन किस से बेहतर है. खूब लड़े, खूब लड़े, मगर कोई फैसला ना हो सका. थक हार कर उन्होंने यह तय किया के तमाम पेड़ों में से कोई एक उनका राजा बन जाए फिर उसका हम सब पर चले.
अब हर पेड़ ने सोचना शुरू कर दिया. " अगर मैं ही राजा बना दिया जाऊं तो मजे उड़ाउ, सब पर हम चलाओ, सब पर रौब जमाओ  ".
हर पेड़ बड चढ़कर देंगे करने लगा :" मुझे राजा बना दो फिर देखो! मुझे राजा बना दो फिर देखूं!! मुझे राजा बना दो फिर देखूं!!! सारे पेड़ एक साथ चिल्ला रहे थे. जंगल का जंगल बस इसी शोर में डूब गया

इनमें से एक पेड़ जो समझदार था डॉट  कर बोला:" यह चीख पुकार बंद करो! मेरी बातों पर कान धरो! आपस में यूं लड़ लड़ कर ना मारो! सुनो' सोचो और गौर करो! राजा बनने के बाद तुम्हें अपने आप को  बदलना होगा. अगर तुम्हारी ठहनियो पर फल आते हो तो तुम्हें फल पैदा करना बंद करना पड़ेगा. तुम्हारी अपनी सारी ताकत इस बात पर लगानी होगी कि तुम ऊंचे, और ऊंचे, और ऊंचे होते जा उ. तुम्हारी डालें और घनीऔर लंबी होती जाए, तुम्हारा तना और मोटा, और मोटा होता जाए. ऐसे ही ऊंचा, घना, मजबूत पेड़ राजा बन सकता है. समझे? 

सारे पेड़ों को यह सुनकर सांप सुन गया. शेखी बड़ी हवा हो गई. आप क्या करें? वह सर झुका कर सोचने लगे. एक ने दूसरे से, दूसरे ने तीसरे से और तीसरे ने चौथे से कहा...
.... " तो कौन सा पेड़ राजा बन सकता है? "
सबसे पहले पेड़ों ने अमरूद के पेड़ से पूछा:" तुम हमारे राजा बनोगे? "
" ना भाई ना!" अमरूद का पेड़ नाक सिकुड़ का बोला" मैं अपने फल पैदा करना नहीं छोडूंगा. ह!बस लंबे और घने होने से क्या मिल जाएगा".
अब सारे पेड़ों ने अंजीर के पेड़ का रुख किया. पूछा:" तुम हमारे राजा बनोगे? " अंजीर के पेड़ ने जवाब दिया :" मैं पागल तो नहीं हूं! मेरे अंजीर कितने मीठे होते हैं! मैं राजा बनने के लिए अंजीर पैदा करना छोड़ दूं! अपनी रसम तोड़ दूं! ना बाबा ना, मुझे राजा नहीं बन्ना!" यह कहते हुए अंजीर का पेड़ दूसरी तरफ देखने लगा.

सारे पेड़ परेशान थे. सोचा अंगूर की बेल जरा सीधी-सादी दिखाई देती है. पेड़ का पेड़, बेल की बेल. शायद हमारी बात मान ले. अब पेड़ों ने अंगूर की बेल से सवाल किया :" ए बहन! देखो हम कितने अच्छे हैं. तुम्हें राजा बनाना चाहते हैं, बोलो तैयार हो ? शाबाश!".

अंगूर की नाजुक बेल कुछ देर चुप रही फिर बोली:" भाइयों! यह आपका एहसान है जो आपकी नजर में मेरा इतना मान है. मगर मेरे मीठे, रसीले अंगूर सभी पसंद करते हैं. मुझे दूसरों का ख्याल है. यह ख्याल कैसे छोड़ दूं, लोगों का दिल कैसे तोड़ दूं? "

एक-एक करके सारे फलदार पेड़ों ने राजा बनने से इनकार कर दिया. सारे पेड़ समझ गए की कोई फलदार पेड़ इस चक्कर में नहीं आएगा सब के सब जैसे ही वैसे ही रहना चाहते है. राजा बनना चाहो तो ना ना ना करते हैं. अपने फलों पर मरते हैं. बस इन्हीं का दम भरते हैं.

जब बहुत सर खपाया कुछ समझ में नहीं आया तो सारे पेड़ों ने इस समझदार पेड़ को अपनी-अपनी डाले झुका कर सलाम किया और पूछा :

अब हमारा राजा कौन बने सब पर जिसका हुकुम चले "

समझदार पेड़ ने अफसोस से सर हिला का जवाब दिया " अरे नादानों! क्या, अब भी नहीं समझे! पेड़ वही अच्छा है जो सबके दिल को भाए, जिसका फल हर एक खाए. राजा की तुम्हें क्या जरूरत! हुकुम चलवाने की क्या हाजत? अपने-अपने काम में लगे रहो फल पैदा करने में जुटे रहो  ".

कहते हैं कि वह दिन और आज का दिन फिर कभी जंगल के पेड़ों में कोई झगड़ा नहीं हुआ.





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