साहसी सुंदरलाल

 


नर्मदा नदी के तट पर बुदनी नामक एक गाँव है । यह गाँव पहाड़ों के बीच बसा हुआ है । तीन ओर विंध्याचल की ऊँची-ऊँची चोटियाँ हैं। एक ओर कल-कल करती हुई नर्मदा नदी बहती है । उत्तर भारत को दक्षिण भारत से जोड़नेवाली मुख्य रेल - लाइन इसी गाँव से, इन्हीं पहाड़ियों के बीच से जाती है । बारहों मास रेल लाइन का पूरा ध्यान रखा जाता है । चौबीस घंटों उस पर एक प्रकार का पहरा - सा दिया जाता है । रेल लाइन की देख-रेख करनेवाले पोर्टर, गैंगमैन बुदनी और उसके आसपास के गाँवों में रहते हैं ।रामखिलावन नाम का एक ऐसा ही गैंगमैन बुदनी में रहता था । रामखिलावन का एक लड़का था । उसका नाम सुंदरलाल था । सुंदरलाल दिन भर स्कूल में पढ़ता था । शाम को थोड़ी देर खेल - कूद कर अपने पिता को रोटी पहुँचाने चौकी पर जाया करता था । ये चौकियाँ दूर जंगल में बनी होती थीं ।

MUHIB 

एक शाम की बात है । नित्य की तरह सुंदरलाल की माँ ने उसे रोटी बाँध दी । वह उसे अपने पिता को देने चल पड़ा । थोड़ी दूर जाने के बाद अचानक काले-काले बादल घिर आये। चारों ओर अँधेरा छा गया। सुंदरलाल ने अपनी चाल बढ़ा दी । वह पानी बरसने के पहले ही रेल लाइन के किनारे बनी चौकी पर पहुँचना चाहता था । सुंदरलाल बादलों को देखकर जान गया था कि आज पानी जोरों से बरसेगा । उसकी आशंका ठीक थी । सुंदरलाल थोड़ी दूर ही चल पाया था कि पानी जोरों से बरसने लगा ।

पानी से बचने के लिए सुंदरलाल एक पेड़ के नीचे खड़ा हो गया । आसमान में रह-रहकर बादलों की गड़गड़ाहट होती थी । उससे सारा वाता- वरण काँप उठता था । लगता था, आकाश में बड़ी-बड़ी तोपें गोले छोड़ रही हैं, टैंक चल रहे हैं। बिजली चमकती, तो पेड़ों पर अपने घोसलों में छिपे पक्षी भी सिहर जाते । इतने में बड़े जोरों की बिजली कड़की । उसके प्रकाश में विंध्यपर्वत की ऊँची-ऊँची पहाड़ियाँ चमक उठीं । वे किसी काले दैत्य के सिर की भाँति दिखाई दे रही थीं । सुंदरलाल साहसी लड़का था । जाने कितनी बार वह इस रेल लाइन पर आया गया था । पर आज उसकी भी हिम्मत टूट गयी ।

सुंदरलाल का ध्यान हाथ के डिब्बे पर गया । उसे ध्यान आया कि उसका पिता भूखा होगा । उसकी राह देख रहा होगा । वह तेजी से चौकी की ओर चल दिया ।

पानी अब भी बरस रहा था । रह-रहकर बिजली भी चमक रही थी । जब पानी कुछ थमता, तो साँय-साँय हवा चलने लगती । वह पेड़ों की डालों से टकराती तो बड़ी डरावनी आवाज होती ।

सुंदरलाल रेल-लाइन के बीचोबीच चला जा रहा था । वह मन-ही-मन · डर रहा था पर साहस से भी काम ले रहा था । उसे मालूम था कि बरसात के दिनों में बिजली चमकती और बादल गड़गड़ाते ही हैं। उनसे क्या डरना ? वह जानता था कि जंगली पशुओं से डरने की बात नहीं है । वे भी इस समय किसी पेड़ या चट्टान के नीचे दुबके होंगे ।

अचानक बिजली चमकी । सुंदरलाल ने सामने देखा तो काँप गया । रेल-लाइन के बीचोबीच एक चट्टान आ गिरी थी । चट्टान काफी बड़ी थी । सुंदरलाल उसके पास पहुँचा । उसने देखा कि चट्टान गिरने से लाइन टूट गयी है । अब तो पिता के पास पहुँचना और जरूरी था । सुंदरलाल ने चट्टान पार की । वह चौकी की ओर सरपट दौड़ पड़ा ।

चौकी पर पहुँचकर उसने अपने पिता को सारी बातें बतलायीं । उसका पिता रामखिलावन उससे, “यहीं ठहरो । मैं स्टेशन पर जाकर खबर कर देता हूँ । कहकर स्टेशन की ओर दौड़ पड़ा ।

रामखिलावन को गये पंद्रह-बीस मिनट भी नहीं हुए कि सुंदरलाल को लगा, इंजिन की सीटी की आवाज आ रही है । इस समय किसी गाड़ी के आने का समय न था । सुंदरलाल ने सोचा, शायद उसे भ्रम हुआ है । पर थोड़ी देर बाद फिर सीटी की आवाज सुनायी दी ।

सुंदरलाल तत्काल दौड़कर रेल लाइन पर आ गया । उसने रेल की पटरी पर कान रखे । उसे गड़गड़ की हल्की-सी आवाज सुनायी दी । सुंदरलाल को विश्वास हो गया कि कोई गाड़ी आ रही है । गाड़ी का ख्याल आते ही वह काँप गया । उसे मालूम था कि चट्टान के कारण गाड़ी उलट जायेगी । नीचे सैकड़ों फीट गहरी खाई में वह गिर पड़ेगी और फिर..... । सुंदरलाल की समझ में नहीं आया कि क्या करे ? कैसे गाड़ी रोके ?

इतने में फिर बिजली चमकी । उसके प्रकाश में सुंदरलाल की दृष्टि चौकी से कुछ दूर लगे सिगनल पर जा पड़ी । सिगनल झुका हुआ था ।

अचानक सुंदरलाल के मस्तिष्क में एक विचार आया । वह सिगनल की ओर दौड़ पड़ा । पर ठोकर खाकर गिर पड़ा । उसने चोट पर कोई ध्यान नहीं दिया । पलक मारते वह सिगनल पर चढ़ गया । जब वह सिगनल के ऊपर पहुँचा तब उसे अंधकार में तेजी से अपनी ओर बढ़ता हुआ प्रकाश का गोला दिखायी दिया । यह इंजिन का हेड लाइट था । इसका अर्थ यह था कि गाड़ी पूरी गति से बढ़ी आ रही है । अब बिलंब से बहुत बड़ी हानि होगी । सुंदरलाल ने सिगनल के पीछे लगी बत्ती को निकाल लिया । इस बत्ती के सामने सिगनल का हरा काँच था । जब बत्ती हट गयी, तो हरा प्रकाश भी गायब हो गया। अब सुंदरलाल ने बत्ती को सिगनल के लाल काँच के सामने रख दिया । अंधकार में लाल रंग चमक उठा ।

उधर इंजिन के ड्राइवर ने जब सिगनल में हरे रंग के बजाय लाल रंग देखा, तो उसने गाड़ी में ब्रेक लगा दी । चीं-चीं कर गाड़ी रुक गयी । इंजिन के प्रकाश में ड्राइवर ने देखा कि सिगनल पर एक लड़का चढ़ा है । ड्राइवर उसकी ओर दौड़ा । इसी बीच सुंदरलाल भी नीचे उतर आया । उसने ड्राइवर को सारी बातें बतलायीं । वह ड्राइवर को लेकर टूटी हुई रेल की पटरी दिखाने चल दिया ।

इसी बीच उधर से रामखिलावन भी स्टेशन मास्टर को लेकर आ गया । स्टेशन मास्टर और ड्राइवर ने सुंदरलाल की बड़ी प्रशंसा की ।

बाद में सरकार ने सुंदरलाल को पुरस्कार भी दिया । सुंदरलाल ने देश की बड़ी सेवा की थी । उस दिन स्पेशल गाड़ी में सैनिक और सैनिक सामग्री थी । यदि गाड़ी खाई में गिर जाती, तो सैकड़ों सैनिक मर जाते और देश की बड़ी हानि होती ।

 


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